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What is IVF? Step-by-Step Guide.

dr pranay shah
DR. PRANAY SHAHTop Ivf Expert

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In this informative video, Dr. Pranay Shah provides a comprehensive overview of In Vitro Fertilization (IVF), addressing key topics including:

00.00 Introduction
00.18 आईवीएफ क्या है? (What is IVF?)
00.56 लोगों को आईवीएफ की आवश्यकता क्यों है? (Why do people need IVF?)
02.04 आईवीएफ चरण दर चरण प्रक्रिया (IVF step by step procedure)
08.07 आईवीएफ के बाद सावधानी (Precaution after IVF)

Explore the intricate journey of In Vitro Fertilization (IVF) in this comprehensive step-by-step guide by Dr Pranay Shah from Wellspring IVF & Women's Hospital. From stimulating the ovaries to the exciting pregnancy test, we break down each crucial stage of the IVF process. Join us to learn about egg retrieval, semen analysis, fertilization, embryo transfer, and the ultimate moment of anticipation – the pregnancy test.

Full Video Transcript

नमस्कार फ्रेंड्स वेल स्प्रिंग आईवीएफ एंड

वूमेंस हॉस्पिटल के न्यू वीडियो में आपका

स्वागत है मैं डॉक्टर प्रणेशा हूं

फर्टिलिटी कंसल्टेंट एंड डायरेक्टर हूं

वेल स्प्रिंग आईवीएफ एंड वमस हॉस्पिटल में

और 10 इयर्स से ज्यादा मुरा फर्टिलिटी

ट्रीटमेंट में एक्सपीरियंस है आज हम बात

करेंगे आईवीएफ क्या है आईवीएफ का फुल

फॉर्म होता है इन विट्रो फर्टिलाइजेशन

मतलब बॉडी के बाहर फर्टिलाइजेशन की

प्रोसीजर होना

जिसको नॉर्मली हम टेस्ट ट्यूब बेबी भी

बोलते हैं दरअसल आईवीएफ एक एडवांस टेक्निक

है जिसमें महिला के अंडो का पुरुष के

शुक्राणु के साथ फर्टिलाइजेशन लैब में

करवाया जाता है और उससे बनने वाले भ्रूण

को है महिला के गर्भाशय के अंदर अंडर

अल्ट्रासाउंड गाइडेंस ट्रांसफर किया जाता

है दरअसल कुदरती तरीके से देखा जाए तो यह

प्रक्रिया महिला के शरीर के अंदर फैलोपियन

ट्यूब में होती है आज हम समझेंगे अ आईवीएफ

किन-किन कंडीशन में करवाने की जरूरत पड़ती

है तो मेजर जो उनके इंडिकेशन है उसमें

पहला है फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक होना दोनों

ही नलिया अगर बच्चेदानी की नलिया अगर

ब्लॉक है तो वो कंडीशन में आईवीएफ की

जरूरत पड़ सकती है दूसरा है अंडों की

संख्या और गुणवत्ता का इशू होना या अंडों

की संख्या काफी कम होना या गुणवत्ता का

इशू होना तो वो केसेस में भी आईवीएफ

करवाने की जरूरत पड़ सकती है तीसरा है मेल

फैक्टर इनफर्टिलिटी जिसमें शुक्राणु के

काउंट गतिशीलता और मॉर्फो जीी का इश्यूज

होता है और नॉर्मल वे में रिजल्ट्स नहीं

मिलता है तो उसमें आईवीएफ की जरूरत पड़ती

है और चौथा इंपॉर्टेंट रीजन है वो अन

एक्सप्लेन इनफर्टिलिटी यानी दोनों ही

पार्टनर मेल एंड फीमेल दोनों के सारे

इन्वेस्टिगेशंस है वो नॉर्मल होने के

बावजूद भी और सारी कंजरवेटिव ट्रीटमेंट

करवाने के बावजूद भी रिजल्ट्स नहीं मिलते

हैं और उसे अन एक्सप्लेन इनफर्टिलिटी की

कैटेगरी में हम गिनते हैं और वो केसेस में

भी आईवीएफ की जरूरत पड़ती है आज हम

समझेंगे आईवीएफ प्रोसीजर स्टेप बाय स्टेप

मींस आईवीएफ के स्टेप्स क्या है बेसिकली

आईवीएफ के चार चरण

है फर्स्ट पहला जो चरण है वो

इन्वेस्टिगेशन का है कपल का इन्वेस्टिगेशन

होता है दूसरा है हार्मोनल इंजेक्शंस की

मदद से हम अंडों को बनाते हैं तीसरा चरण

है अंडर शॉट एनेस्थ शिया वो अंडों को बॉडी

के बाहर निकालते हैं और चौथा इंपॉर्टेंट

चरण है कि जब गर्भ तैयार हो चुके हो तो

उसको गर्भाशय में ट्रांसफर करने का चरण है

और बाद में उसके टू वीक्स लेटर ऑन

प्रेगनेंसी टेस्ट होता है तो जब कपल हमारे

पास ट्रीटमेंट के लिए आते हैं तो सबसे

पहले उनके इन्वेस्टिगेशंस होते हैं जिसमें

अ दोनों के मेल और फीमेल दोनों पार्टनर के

पूरी फर्टिलिटी प्रोफाइल होती है मेल के

अंदर देखा जाए तो उनका सेमन एनालिसिस होता

है इफेक्स डिसीज रोल आउट होते हैं अ फीमेल

के अंदर देखा जाए तो उनके फिटनेस

इन्वेस्टिगेशन होते हैं हार्मोनल प्रोफाइल

होती है अ उनके भी इनफेक्शियस डिसीज है वो

रूल आउट होते हैं उनकी सोनोग्राफी की जाती

है और अगर जरूरत पड़े तो दोनों ही पार्टनर

का वो केरियो इपिंग भी है वो किया जाता है

और फीमेल पार्टनर में अगर हमें कोई

एनाटॉमिकल इश्यूज लग रहा है तो दूरबीन से

जांच जांच जिसको हिस्ट्रोस्कोपी और

लेप्रोस्कोपी बोलते हैं तो वो भी करने की

जरूरत पड़ सकती है हां सारे केसेस में

हिस्ट्रोस्कोपी लेप्रोस्कोपी करना वो

जरूरी नहीं है है वो इंडिकेटेड केसेस में

ही किया जाता है अब ट्रीटमेंट शुरू पीरियड

के वाइफ के पीरियड के सेकंड डे से स्टार्ट

होती है

जिसमें 10 टू 12 डेज हार्मोनल इंजेक्शन

चलते हैं दीज आर जस्ट लाइक डायबिटीज वाले

पेशेंट इंसुलिन खुद घर पे ले पाए वैसे उसी

तरह के पेनलेस इंजेक्शंस होते हैं खुद घर

पे आराम से ले सकते हैं हमारे वहां जब

पीरियड के दूसरे दिन आते हैं तब उनको

इंजेक्शन सिखा देते हैं तो बाकी के सारे

इंजेक्शन वो आराम से घर पर ले सकते हैं 10

से 12 दिन यह हार्मोनल इंजेक्शन चलते हैं

और बीच में फॉलिकुलर मॉनिटरिंग होता है

जिससे पता चले कि फॉलिकल्स जो ग्रो हो रहे

हैं उसका प्रोग्रेस क्या है हार्मोनल

इंजेक्शन के डोज बढ़ाने की जरूरत है

डिक्रीज करने की जरूरत है उसका हमें

आईडिया रहता है अब 10 12 दिन में जब सारे

फॉलिकल्स मैच्योर हो जाए तब दूसरा जो फेज

आता है अंडर शॉर्ट एनेस्थीसिया एग ट्राइवल

की प्रोसीजर होती है उस दिन हम हम वाइफ को

मींस फीमेल पार्टनर को एमटी स्टमक बुलाते

हैं और उस दिन अंडर शॉर्ट एनेस्थीसिया यह

प्रोसीजर होती है अंडर अल्ट्रासाउंड

गाइडेंस ये एग्स ट्राइव करते हैं और ये

बेसिकली पेनलेस प्रोसीजर होती है 15 टू 20

मिनट की प्रोसीजर रहती है और प्रोसीजर के

बाद एक आध घंटे में हम डिस्चार्ज दे देते

हैं तो वो डे केयर ओपीडी बेस प्रोसीजर

होती है उसमें कहीं भी फुल डे एडमिशंस

रखने की जरूरत 99 पर केस में नहीं पड़ती

है जब एग रिट्रे वल हो जाए उसी दिन हम

हस्बैंड का भी सीमन सैंपल है वह कलेक्शन

करवाते हैं सेमन सैंपल कलेक्शन करवाने के

बाद उसकी वाशिंग प्रोसीजर करके उसमें से

जो एक्टिव मोटाईल स्पर्म है जो नॉर्मल

मॉर्फो जीी वाले स्पर्म है उसको सेपरेट

करते हैं फिर उसके बाद दो तरह की प्रोसीजर

पॉसिबल है एक है आईवीएफ और दूसरा है इक्सी

प्रोसीजर आईवीएफ में होता क्या है कि

फीमेल के एग्स यानी जो स्त्री है उनके

अंडे लेने के बाद वो अंडे पटर डिश में

रखते हैं और स्पर्म्स है वश करने के बाद

वो भी पेटर डिश में रखते हैं और उसका

फर्टिलाइजेशन नेचरली अंडर इनक्यूबेटर होने

दिया जाता है और दूसरा जो अप्रोच होता है

वह है इक्सी प्रोसीजर

जिसमें फीमेल के अंडे का हस्बैंड के

शुक्राणु के साथ फर्टिलाइजेशन विद द हेल्प

ऑफ इक्सी मशीन एक एक शुक्राणु फीमेल के

अंडे में इंजेक्ट करके करने के बाद किया

जाता है उसे इक्सी प्रोसीजर बोलते हैं

ज्यादातर मेजोरिटी क्लिनिक्स अभी इक्सी

प्रोसीजर ही वो रिकमेंड करते हैं क्योंकि

उसमें फर्टिलाइजेशन रेशो है वो काफी अच्छा

रहता है और फर्टिलाइजेशन होने के बाद एवरी

डे फिर एंब्रिस का ग ग्रोथ मॉनिटर करते

हैं फर्टिलाइजेशन के बाद एक में से दो सेल

दो में से चार सेल चार में से 16 सेल 16

सेल में से फिर कॉम्पेक्शन मोरोला स्टेज

और मोरोला स्टेज के बाद पाच दिन के अंदर

ब्लास्टो सिस स्टेज के मैचोर एंब्रियो है

वो बन जाते हैं और मैचोर गर्भ बन जाने के

बाद बेसिकली दो अप्रोच होते हैं एंब्रियो

ट्रांसफर के जो आईवीएफ का चौथा चरण है या

तो एंब्रिस ब्रू है उनको उसी महीने में

फीमेल पार्टनर के बच्चेदानी के अंदर

ट्रांसफर किया जाए जिसे फ्रेश आईवीएफ

साइकिल बोलते हैं मेजोरिटी केस में नाव

डेज 99 पर केस में हम यह अप्रोच प्रेफर

नहीं करते हैं क्योंकि उसमें थोड़ा

इंप्लांटेशन रेट है सक्सेस रेट है वह

दूसरे अप्रोच से कंप्रोमाइज होता है

एंब्रो ट्रांसफर हो जाए उसके 14 दिन बाद

प्रेगनेंसी टेस्ट करते हैं यह है एक फ्रेश

आईवीएफ साइकल का अप्रोच जो हम मोस्ट कॉमन

अप्रोच यूज करते हैं वह है फ्रोजन थ

आईवीएफ साइकिल का अप्रोच यानी गर्भ बन जाए

तब सारे गर्भ है वह फ्रीज कर देंगे जितने

भी गर्भ बने हैं एक भी गर्भ वो महीने में

ट्रांसफर नहीं करेंगे फीमेल पार्टनर का

पीरियड है वह दो हफ्ते में वापस आएगा वह

पीरियड के दूसरे दिन से बच्चेदानी की

चमड़ी बनने की द दूसरे महीने में 1820 दिन

दवाई चलेगी और बच्चेदानी की चमड़ी जब 20

दिन में बन जाए तब यह प्रीवियस मंथ में जो

फ्रीज किए हुए एंब्रियो है वो डी फ्रीज

करके हम ट्रांसफर करते हैं हम मैक्सिमम

अराउंड टू एंब्रिस तक ट्रांसफर करते हैं

और एंब्रियो ट्रांसफर करने के बाद दो

हफ्ते बाद प्रेगनेंसी टेस्ट होता है

एंब्रियो ट्रांसफर प्रोसीजर भी पेनलेस

प्रोसीजर होती है जस्ट लाइक एन आईयूआई

प्रोसीजर अंडर अल्ट्रासाउंड गाइडेंस हम

एमब्रोस ट्रांसफर करते हैं उसमें

एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं पड़ती उसमें भी

फुल डे एडमिशन की जरूरत नहीं पड़ती

ट्रांसफर के बाद आधा घंटा एक आ घंटा रेस्ट

रहता है और उस दिन घर पर जा सकते हैं अब

एंब्रो ट्रांसफर के बाद बेसिकली प्रिकॉशंस

क्या लिए जाते हैं तो हम एंब्रियो

ट्रांसफर के बाद फीमेल को उनका रूटीन वर्क

करने की परमिशन देते हैं जो काम नेचुरली

वह कर रहे हैं वह सारा कर सकते हैं कहीं

भी बेड रेस्ट की जरूरत नहीं होती है हां

बैलेंस डाइट है वह एडवाइस करते हैं

आउटसाइड फूड फूड हो सके तो हम अवॉइड करने

की एडवाइस देते हैं फ्रूट्स में जनरली

पपैया है वह हम अवॉइड करने के लिए बोलते

हैं बाकी सीजनल सारा फ्रूट्स और बैलेंस

डाइट है वो ले सकते हैं

हां साइकलिंग जिम जॉगिंग हैवी वेट

लिफ्टिंग स्ट्रेनर्स एक्सरसाइज वो हो सके

तो अवॉइड करने की एडवाइस देते हैं और जो

सबसे इंपॉर्टेंट जो होता है वो

प्रोजेस्ट्रोन सपोर्ट यानी एमरो ट्रांसफर

के बाद जो हार्मोनल सपोर्ट दिया जाता है

मेडिकेशन जो दी जाती है वो रेगुलर फॉलो

करनी रहती है है और एंब्रो ट्रांसफर के

बाद दो हफ्ते में प्रेगनेंसी टेस्ट होता

है तो इस तरह से यह आईवीएफ की ये एंटायस

जर होती है मैंने दो अप्रोच के बारे में

समझाया एक है फ्रेश साइकिल दूसरा है

फ्रोजन तो साइकिल फ्रेश साइकिल एक महीने

में खत्म हो जाती है फ्रोजन तो साइकिल पने

तो दो महीने में खत्म होती है फ्रेश

साइकिल में चार से पांच विजिट है वह

हॉस्पिटल्स में थ्रू आउट रहती है जबकि

फ्रोजन तो साइकिल में अराउंड सिक्स टू

सेवन विजिट रहती है दोनों ही अप्रोच में

सारी विजिट्स टू एंड फ्रो रहती है कहीं

रुकना नहीं पड़ता सिर्फ दो विजिट में दो

से तीन घंटे रुकना पड़ता है जिस दिन हम

बीच अंडे निकालते हैं तब और जिस दिन गर्भ

रखते हैं तब और एनेस्थीसिया एक ही बार

दिया जाता है जिस दिन बीज लेते हैं तब तो

उस तरह से यह दो अप्रोच होते हैं और

मेजोरिटी केस में हम फ्रोजन थ आईवीएफ

साइकिल प्रेफर करते हैं ओवर फ्रेश आईवीएफ

साइकिल बिकॉज उसका सक्सेस रेट है व काफी

अच्छा रहता है तो होप दोस्तों आपको यह

आईवीएफ प्रोसीजर के बारे में बेसिक जो

आईडिया प्रोसीजर के क्या स्टेप्स रहते हैं

उसका आ गया होगा फिर भी आपको कुछ क्वेरीज

है तो आप हमें कांटेक्ट कर सकते हो या

हमारा कंसल्टेशन लेकर सारी इंफॉर्मेशन है

वह ले सकते हो अब तब तक के लिए

नमस्कार

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